समाजसेवी राजवर्धन सिंह राजू ने मिशन आत्मसंतुष्टि के तहत आशा बहनों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ मनाया रक्षाबंधन पर्व
Mission Atmasantushtiरक्षाबंधन, भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक पर्व, इस वर्ष भी पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। इसी कड़ी में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी जनपद हरदोई के प्रमुख समाजसेवी एवं सर्वज्ञात सेवाभावी व्यक्तित्व, श्री राजवर्धन सिंह राजू ने मिशन आत्मसंतुष्टि के तहत एक अनूठी मिसाल पेश की। उन्होंने सवायजपुर विधानसभा के ब्लॉक हरपालपुर और सांडी के गौरव गेस्ट हाउस में आशा बहनों, सखी समूह और अन्य सामाजिक कार्यकत्रियों से रक्षासूत्र बंधवाकर इस पावन पर्व को खास बनाया।
राखी से बंधा आत्मीयता का बंधन
इस अवसर पर श्री राजवर्धन सिंह राजू ने कहा —
“रक्षाबंधन केवल एक धागा बांधने का दिन नहीं है, बल्कि यह हमारे खूबसूरत रिश्तों का जश्न मनाने का अवसर है। यह दिन हमें आपसी विश्वास, प्रेम और जिम्मेदारी की याद दिलाता है। इस राखी पर मैं सभी बहनों की खुशी और सलामती की प्रार्थना करता हूं। आप दुनिया के सारे प्यार और सफलता की हकदार हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि भाई-बहन का रिश्ता समय और दूरी से परे है, और रक्षाबंधन जैसे पर्व इस बंधन को और मजबूत बनाते हैं। उन्होंने दुआ की कि बहनों के घर हमेशा फूलों की खुशबू और खुशियों से महकते रहें —
“या रब मेरी दुआओं में इतना असर रहे, फूलों भरा सदा मेरी बहना का घर रहे।”
मिशन आत्मसंतुष्टि की अनूठी पहल
श्री राजवर्धन सिंह पिछले कई वर्षों से मिशन आत्मसंतुष्टि के माध्यम से समाजसेवा में सक्रिय हैं। रक्षाबंधन का पर्व वह अलग-अलग ब्लॉकों में जाकर आशा बहनों और सामाजिक कार्यकत्रियों के साथ मनाते हैं। इसका उद्देश्य सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि इन बहनों के प्रति सम्मान और उनके योगदान को सराहना है।
आशा बहनें स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में गाँव-गाँव तक अपनी मेहनत और लगन से लोगों की सेवा करती हैं। इन्हीं के प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण, मातृ-शिशु देखभाल, पोषण जागरूकता और बीमारियों की रोकथाम संभव हो पाती है। श्री सिंह का यह कदम इनकी मेहनत और समर्पण को सलाम करने का एक माध्यम है।
गौरव गेस्ट हाउस बना भाईचारे का केंद्र
इस अवसर पर गौरव गेस्ट हाउस का माहौल भावनाओं और भाईचारे से सराबोर था। बड़ी संख्या में आशा बहनें, सखी समूह की महिलाएं और अन्य सामाजिक कार्यकर्ता यहाँ एकत्र हुए। सभी ने भाई-बहन के इस पावन पर्व पर श्री सिंह को राखी बांधकर उनका आशीर्वाद लिया।
कार्यक्रम में बहनों ने श्री सिंह को तिलक किया, मिठाई खिलाई और राखी बांधी। बदले में श्री सिंह ने सभी बहनों को उपहार प्रदान किए और हर संभव मदद का आश्वासन दिया। इस अवसर पर उपस्थित लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला।
आशा बहनों के चेहरे पर मुस्कान
कार्यक्रम में शामिल हुईं आशा बहनों और सखी समूह की महिलाओं ने इस पहल को बेहद सराहा। उनका कहना था कि आमतौर पर समाज में आशा बहनों के काम को उतनी पहचान नहीं मिलती जितनी मिलनी चाहिए, लेकिन ऐसे कार्यक्रम हमें सम्मान और प्रेरणा देते हैं।
एक आशा बहन ने कहा —
“हमारा काम लोगों की सेवा करना है, लेकिन जब समाजसेवी जैसे राजू भाई साहब हमारे साथ इस तरह का पर्व मनाते हैं, तो लगता है कि हमारी मेहनत को सच्चा सम्मान मिल रहा है।”
हर वर्ष जारी रहने वाली परंपरा
श्री सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आयोजन एक बार का नहीं, बल्कि हर वर्ष आयोजित होने वाला पर्व है।
“जब तक जीवन है, मैं इस परंपरा को निभाता रहूंगा। यह केवल रक्षाबंधन मनाने का अवसर नहीं, बल्कि हमारे बीच के प्रेम और विश्वास को मजबूत करने का माध्यम है।”
स्थानीय समाज का सहयोग
कार्यक्रम में कई पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता, और स्थानीय लोग भी उपस्थित रहे। सभी ने श्री सिंह के प्रयासों की सराहना की। उनका कहना था कि ऐसे आयोजनों से समाज में एक सकारात्मक संदेश जाता है, जिससे भाईचारे और एकता की भावना प्रबल होती है।
उपहार और वादे
राखी बांधने के बाद श्री सिंह ने सभी बहनों को उपहार स्वरूप उपयोगी सामग्री प्रदान की और कहा —
“मैं हमेशा आपके साथ खड़ा हूं। आप लोगों ने समाज के लिए जो सेवाएं दी हैं, वह अमूल्य हैं। आने वाले समय में भी मैं आपकी हर संभव मदद करता रहूंगा।”
मौके पर मौजूद गणमान्य लोग
इस कार्यक्रम में अनेक गणमान्य व्यक्ति, पत्रकार, और समाजसेवी शामिल हुए। उन्होंने इस पहल को अनुकरणीय बताते हुए कहा कि अगर हर व्यक्ति अपने समाज के मेहनती और समर्पित कार्यकर्ताओं को पहचान दे और उन्हें सम्मानित करे, तो समाज में सकारात्मक बदलाव स्वतः आ सकता है।
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रक्षाबंधन का सामाजिक और भावनात्मक महत्व
रक्षाबंधन केवल एक पर्व नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति, परंपरा और पारिवारिक मूल्यों का जीवंत प्रतीक है। यह त्योहार हमें न केवल अपने रिश्तों को संजोने की प्रेरणा देता है, बल्कि समाज में आपसी प्रेम और एकजुटता का संदेश भी फैलाता है।
राजवर्धन सिंह राजू की यह पहल हमें यह सिखाती है कि भाईचारा केवल रक्त संबंधों तक सीमित नहीं है। यह हर उस रिश्ते में है जिसमें स्नेह, विश्वास और जिम्मेदारी हो। आशा बहनों, सखी समूह और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ रक्षाबंधन मनाना इस बात का प्रमाण है कि समाज में योगदान देने वाले हर व्यक्ति को सम्मान और प्यार मिलना चाहिए।
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निष्कर्ष
राजवर्धन सिंह राजू द्वारा आयोजित यह रक्षाबंधन पर्व न केवल एक धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन था, बल्कि एक सामाजिक संदेश भी था — कि हम सबको अपने आस-पास के लोगों के प्रति संवेदनशील और आभारी होना चाहिए। उनकी यह परंपरा आने वाले वर्षों में भी जारी रहेगी और निस्संदेह यह समाज में भाईचारे, प्रेम और एकजुटता की मिसाल पेश करती रहेगी।
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शुभकामनाएं:
“सभी भाई-बहनों को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं। यह पावन बंधन हमारे रिश्तों को सदा मजबूत बनाता रहे और सभी के जीवन में खुशियां, समृद्धि और प्रेम लेकर आए।”