मिशन आत्मसंतुष्टि (Mission Atmasantushti)
सेवा परमो धर्म – आत्मा की सच्ची तृप्ति केवल परोपकार में है
सेवा परमो धर्म: भारतीय संस्कृति की आत्मा
“सेवा परमो धर्म” केवल एक वाक्य नहीं बल्कि जीवन की वह आधारशिला है जिस पर भारतीय संस्कृति खड़ी है। यह सिद्धांत हमें सिखाता है कि सेवा न केवल मानवता का कर्तव्य है बल्कि आत्मा की परम संतुष्टि का मार्ग भी है। मिशन आत्मसंतुष्टि इसी सोच को लेकर आगे बढ़ रहा है।
इस मिशन की नींव एक ऐसे व्यक्तित्व द्वारा रखी गई जिनकी सोच, समर्पण और नेतृत्व ने समाज में जागृति का संचार किया — श्री राजवर्धन सिंह राजू।
राजवर्धन सिंह राजू: एक प्रेरणास्रोत
राजवर्धन सिंह राजू जी ने अपना पूरा जीवन समाज सेवा, नैतिक उत्थान और आध्यात्मिक जागरण को समर्पित कर दिया। उन्होंने ‘सेवा परमो धर्म’ को अपने जीवन का मूल मंत्र बनाते हुए हजारों लोगों को प्रेरित किया। उनके नेतृत्व में मिशन आत्मसंतुष्टि ने ग्रामीण भारत के विकास, महिला सशक्तिकरण और बच्चों की शिक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उनकी सबसे महान उपलब्धियों में से एक है शिवपाल सिंह जनकल्याण संस्था की स्थापना, जो कि आज ग्रामीण भारत में परिवर्तन की धुरी बन चुकी है। यह संस्था शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, स्वच्छता और संस्कृति के क्षेत्रों में निःस्वार्थ सेवा कर रही है।
शिवपाल सिंह जनकल्याण संस्था: ग्रामीण भारत का सेवाभावी केंद्र
राजवर्धन सिंह राजू द्वारा स्थापित शिवपाल सिंह जनकल्याण संस्था आज लाखों जरूरतमंदों के लिए आशा की किरण है। इस संस्था का लक्ष्य है – “हर गाँव, हर दिल तक सेवा पहुँचे”। यह संस्था गांव-गांव जाकर निःशुल्क शिक्षा, स्वास्थ्य शिविर, महिला जागरूकता कार्यक्रम और स्वरोजगार प्रशिक्षण प्रदान कर रही है।
संस्था की महिला सशक्तिकरण पहल ने हजारों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया है। वहीं नारी शक्ति को केंद्र में रखकर आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने की दिशा में अग्रसर है।
मिशन आत्मसंतुष्टि और शिवपाल सिंह जनकल्याण संस्था का समन्वय समाज को न केवल आत्मनिर्भर बना रहा है, बल्कि उसे सांस्कृतिक मूल्यों से भी जोड़ रहा है।
